महाशिवरात्रि
महाशिवरात्रि भगवान शिव की परम पावन महारात्रि है। इस दिन शिव-पार्वती का पावन विवाह तथा ज्योतिर्लिंग का प्राकट्य हुआ था।
महाशिवरात्रि पूजा मुहूर्त (२०२६)
आगामी वर्षों की तिथियाँ (२०२५ - २०२७)
| वर्ष | पर्व दिनांक | तिथि एवं मास |
|---|---|---|
| २०२५ | 2025-02-26 | फाल्गुन (कृष्ण चतुर्दशी) |
| २०२६ (वर्तमान वर्ष) | 2026-02-15 | फाल्गुन (कृष्ण चतुर्दशी) |
| २०२७ | 2027-03-06 | फाल्गुन (कृष्ण चतुर्दशी) |
धार्मिक महत्व एवं पौराणिक कथा
भक्तजन अहोरात्र व्रत रखकर शिवलिंग का गंगाजल, दुग्ध, शहद एवं पंचामृत से रुद्राभिषेक करते हैं। त्रिदल बिल्वपत्र अर्पित करने से तीनों तापों से मुक्ति प्राप्त होती है।
सरल एवं शास्त्रोक्त पूजा विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
- शिवलिंग का गंगाजल से अभिषेक करें।
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शर्करा) से क्रमवार अभिषेक करें।
- पुनः शुद्ध जल से स्नान कराकर त्रिपुंड चंदन लगाएँ।
- अखंडित तीन पत्तों वाले बिल्वपत्र चिकनी ओर से शिवलिंग पर अर्पित करें।
- धतूरा, भांग, भस्म, श्वेत मदार के पुष्प एवं जनेऊ समर्पित करें।
- घी का दीपक व धूप जलाएँ।
- रुद्राक्ष माला से 'ॐ नमः शिवाय' का १०८ बार जप करें।
- महामृत्युंजय मंत्र एवं शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें।
- शिव जी की आरती कर रात्रि जागरण करें।
आवश्यक पूजन सामग्री सूची
पूजन एवं ध्यान हेतु पवित्र मंत्र
महामृत्युंजय मंत्र
सरल भावार्थ: We worship the three-eyed Lord Shiva who is fragrant and nourishes all beings. May He liberate us from death and bondage, as a ripe cucumber is severed from its vine, into immortality.
पंचाक्षरी शिव मंत्र
सरल भावार्थ: I bow with deep reverence to Lord Shiva, the auspicious Supreme Consciousness.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
निशीथ काल क्या है और शिवरात्रि पर इसका क्या महत्व है?
निशीथ काल मध्यरात्रि का वह समय है जब ब्रह्मांडीय ऊर्जाएं चरम पर होती हैं। शिवपुराण के अनुसार इसी पावन वेला में भगवान शिव ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए थे।