भाद्रपद (शुक्ल चतुर्थी)विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश

गणेश चतुर्थी (विनायक चतुर्थी)

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को विघ्नविनाशक, बुद्धिदाता श्री गणेश जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। यह पर्व अनंत चतुर्दशी तक १० दिन चलता है।

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प्रमाणित मुहूर्त

गणेश चतुर्थी (विनायक चतुर्थी) पूजा मुहूर्त (२०२६)

दिनांक (२०२६)2026-09-14
शुभ पूजा समयप्रातः 11:07 से दोपहर 01:34 तक (मध्याह्न)
प्रदोष कालसायं 06:28 से 08:48 तक
शुभ लग्नवृषभ लग्न

आगामी वर्षों की तिथियाँ (२०२५ - २०२७)

वर्षपर्व दिनांकतिथि एवं मास
२०२५2025-08-27भाद्रपद (शुक्ल चतुर्थी)
२०२६ (वर्तमान वर्ष)2026-09-14भाद्रपद (शुक्ल चतुर्थी)
२०२७2027-09-04भाद्रपद (शुक्ल चतुर्थी)

धार्मिक महत्व एवं पौराणिक कथा

घरों और पंडालों में मिट्टी की गणेश प्रतिमा स्थापित कर प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है। प्रतिदिन २१ दूर्वा और २१ मोदक अर्पित कर मंगल कामना की जाती है।

सरल एवं शास्त्रोक्त पूजा विधि

  1. भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन से बचें (कलंक निवारण हेतु)।
  2. मध्याह्न काल में मिट्टी के गणेश जी की स्थापना करें।
  3. षोडशोपचार विधि से प्राण-प्रतिष्ठा करें।
  4. श्री गणेश जी को सिंदूर और रक्त चंदन का तिलक लगाएं।
  5. २१ गांठ वाली हरी दूर्वा अर्पित करें।
  6. लाल गुड़हल का पुष्प अर्पित करें।
  7. २१ मोदक अथवा मोतीचूर के लड्डुओं का नैवेद्य लगाएं।
  8. संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ कर आरती करें।

आवश्यक पूजन सामग्री सूची

✓मिट्टी की गणेश प्रतिमा
✓लाल वस्त्र एवं चौकी
✓२१ दूर्वा घास
✓लाल गुड़हल का फूल
✓सिंदूर एवं चंदन
✓२१ मोदक या लड्डू
✓जनेऊ
✓पान, सुपारी और नारियल

पूजन एवं ध्यान हेतु पवित्र मंत्र

वक्रतुण्ड महामंत्र

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

सरल भावार्थ: O Lord with the curved trunk and immense form, possessing the brilliance of millions of suns, remove all obstacles from all my endeavors forever.

❓ जिज्ञासा एवं समाधान

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन क्यों वर्जित है?

पौराणिक मान्यता के अनुसार चंद्रमा के अहंकार पर गणेश जी ने उन्हें शाप दिया था। इस दिन चंद्र दर्शन करने से मिथ्या कलंक लगने का भय रहता है।