आज का पंचांग — तिथि, नक्षत्र, राहु काल, चौघड़िया, शुभ मुहूर्त, पंचक व भद्रा
दैनिक हिन्दू पंचांग — आज की तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार, सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, राहु काल, अभिजित मुहूर्त, दिन व रात का चौघड़िया, पंचक एवं भद्रा की प्रामाणिक खगोलीय गणना।
मुम्बई का आज का पंचांग
शनिवार
अत्यंत अशुभ पंचक; जोखिम भरे कार्य, विवाद, यात्रा व शल्यक्रिया पूर्णतः त्याज्य।
शुभ समय; भद्रा दोष का प्रभाव नहीं है।
पंच अंग — पंचांग के मुख्य घटक
शुभ मुहूर्त एवं प्रशस्त काल
अशुभ काल (त्याज्य समय)
दिन का चौघड़िया (सूर्योदय से सूर्यास्त)
रात का चौघड़िया (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय)
संवत, ऋतु एवं खगोलीय मान
🕉️ संवत एवं काल गणना
🌍 खगोलीय विवरण
🧭 दिशा शूल एवं निवारण
भारत के प्रमुख शहरों का आज का पंचांग
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पंचांग क्या है और दैनिक जीवन में इसका क्या महत्व है?
सनातन हिन्दू संस्कृति में काल की गणना केवल समय नापने का साधन नहीं, अपितु प्रकृति, ब्रह्मांड और जीवात्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने का दिव्य विज्ञान है। पंचांग (Panchang) संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है—'पंच' (पाँच) और 'अंग' (घटक)। ये पाँच अंग हैं:
ऋषि-मुनियों के अनुसार पंचांग के श्रवण मात्र से पापों का क्षय और पुण्य की प्राप्ति होती है: "तिथेश्च श्रियमाप्नोति वारादायुष्यवर्धनम्। नक्षत्राद्धरते पापं योगाद्रोगनिवारणम्॥ करणात् कार्यसिद्धिः स्यात् पञ्चाङ्गफलमुत्तमम्॥" अर्थात् तिथि के ज्ञान से ऐश्वर्य, वार से दीर्घायु, नक्षत्र से पाप-मुक्ति, योग से आरोग्य और करण से कार्य की सिद्धि होती है।
पंचांग संबंधी मुख्य प्रश्नोत्तरी (FAQs)
आज का पंचांग क्या है?
आज का पंचांग सनातन वैदिक कालदर्शक है जो आज की तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण (पंचांग के पाँच अंग) तथा सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, अभिजित मुहूर्त और चौघड़िया की सटीक खगोलीय स्थिति दर्शाता है।
हिंदी पंचांग के अनुसार आज कौन सी तिथि है?
धर्मपंचांग पर आज की तिथि की गणना राष्ट्रीय मानक लाहिड़ी (चित्रापक्षीय) अयनांश के आधार पर रीयल-टाइम में प्रदर्शित है। सूर्योदयकालीन तिथि और तिथि समाप्ति का सूक्ष्म समय ऊपर मुख्य पंचांग पट्टिका में देखा जा सकता है।
भारतीय कैलेंडर के अनुसार आज क्या तिथि है?
भारतीय राष्ट्रीय शक संवत तथा सनातन विक्रम संवत के अनुसार वर्तमान मास, पक्ष (शुक्ल या कृष्ण) और दैनिक तिथि की प्रामाणिक गणना धर्मपंचांग पर निःशुल्क उपलब्ध है।
दिवाली 2026 की सही तिथि और लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
दीपावली 2026 रविवार, 8 नवंबर 2026 को कार्तिक अमावस्या के पावन दिन मनाई जाएगी। लक्ष्मी पूजा का सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त प्रदोष काल एवं स्थिर वृषभ लग्न में सायं 05:40 बजे से 07:38 बजे तक (अवधि: 1 घंटा 58 मिनट) रहेगा।
कल हिंदी कैलेंडर में कौन सी तिथि होगी?
कल की तिथि व नक्षत्र जानने के लिए धर्मपंचांग के त्वरित बटन 'कल' (Tomorrow) पर क्लिक करें। आपको अगले दिन का सम्पूर्ण पंचांग, चौघड़िया व राहुकाल तुरंत प्राप्त हो जाएगा।
पंचांग क्या है और इसके पाँच अंग कौन-से हैं?
पंचांग हिन्दू वैदिक कालदर्शक (अलमनाक) है, जो काल-गणना के पाँच मुख्य अंगों पर आधारित है: १. तिथि (Tithi), २. वार (Vara), ३. नक्षत्र (Nakshatra), ४. योग (Yoga), और ५. करण (Karana)। इसके माध्यम से दैनिक शुभ-अशुभ मुहूर्त, पर्व, उपवास व ग्रह स्थिति का निर्धारण होता है।
राहु काल क्या होता है और इसमें कार्य क्यों नहीं करने चाहिए?
राहु काल दिन का वह लगभग डेढ़ घंटे का समय होता है जिस पर पाप ग्रह राहु का आधिपत्य माना जाता है। इस काल में नया व्यापार, नवीन अनुबंध, गृह प्रवेश अथवा यात्रा का शुभारंभ वर्जित माना जाता है। यह समय प्रतिदिन वार के अनुसार अलग-अलग कालखंड में आता है।
अभिजित मुहूर्त क्या है और इसका क्या महत्व है?
अभिजित मुहूर्त दिन का आठवाँ मुहूर्त है, जो स्थानीय मध्याह्न (दोपहर) के समय घटित होता है। यह दिन का सर्वाधिक शुभ मुहूर्त माना जाता है, जिसमें प्रारंभ किए गए कार्यों में विजय व सफलता प्राप्त होती है। यह मुहूर्त अन्य कई छोटे अशुभ योगों के प्रभाव को निष्फल कर देता है।
चौघड़िया क्या होता है और इसका उपयोग कैसे करें?
चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों (लगभग डेढ़-डेढ़ घंटे) में बाँटकर शुभ-अशुभ समय निर्धारित करने की वैदिक पद्धति है। अमृत, शुभ और लाभ चौघड़िया अत्यंत प्रशस्त होते हैं; चर मध्यम होता है; जबकि रोग, काल और उद्वेग को अशुभ माना जाता है।
शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में क्या अंतर है?
अमावस्या के अगले दिन (प्रतिपदा) से पूर्णिमा तक का समय 'शुक्ल पक्ष' कहलाता है, जिसमें चन्द्रमा का प्रकाश प्रतिदिन बढ़ता है। पूर्णिमा के अगले दिन से अमावस्या तक का समय 'कृष्ण पक्ष' कहलाता है, जिसमें चन्द्रमा घटता जाता है।
पंचक क्या होता है और इसमें क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए?
जब चन्द्रमा कुंभ व मीन राशि में अथवा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती तक के पाँच नक्षत्रों में संचरण करता है, तो उसे पंचक कहते हैं। पंचक में छत ढलवाना, चारपाई या पलंग बुनना, दक्षिण दिशा की यात्रा करना, तृण-काष्ठ संचय करना आदि वर्जित माना जाता है। वार के अनुसार यह रोग, राज, अग्नि, चोर अथवा मृत्यु पंचक कहलाता है।
भद्रा क्या है और इसका वास कब शुभ होता है?
भद्रा विष्टि करण का नाम है जो सूर्य की पुत्री तथा शनिदेव की बहन मानी गई है। जब चन्द्रमा मेष, वृष, मिथुन या वृश्चिक में हो तो भद्रा का वास स्वर्ग में होता है; कन्या, तुला, धनु या मकर में हो तो पाताल में वास होता है। स्वर्ग और पाताल की भद्रा पृथ्वीवासियों के लिए शुभ मानी जाती है। परन्तु कर्क, सिंह, कुंभ या मीन में चन्द्रमा होने पर भद्रा मृत्युलोक (पृथ्वी) पर निवास करती है जो समस्त शुभ कार्यों में त्याज्य है।
पंचांग गणना विधि एवं शास्त्रीय मानक
हमारी पंचांग गणना भारत सरकार की राष्ट्रीय पंचांग सुधार समिति द्वारा स्वीकृत लाहिड़ी (चित्रापक्षीय) अयनांश तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य उच्च-परिशुद्ध खगोलीय अल्गोरिदम (NASA/JPL planetary ephemeris via astronomy-engine) पर आधारित है।
- सूर्योदय एवं सूर्यास्त: स्थानीय अक्षांश-देशांतर तथा वायुमंडलीय अपवर्तन (३४ कला) व सूर्य के अर्धव्यास (१६ कला) का समायोजन कर शीर्ष-केन्द्रीय (topocentric) शुद्धता के साथ संगणित।
- तिथि व नक्षत्र: चन्द्रमा व सूर्य के तात्कालिक सूक्ष्म निरयण भोगांशों के आधार पर पूर्णतः सटीक।
- गोपनीयता एवं वेग: समस्त गणनाएँ १००% आपके अपने ब्राउज़र में स्थानीय रूप से निष्पादित होती हैं। कोई भी व्यक्तिगत स्थान अथवा डेटा किसी सर्वर पर नहीं भेजा जाता।