माँ महालक्ष्मी

महालक्ष्मी मंत्र एवं श्री सूक्तम (वैदिक लक्ष्मी साधना)

मूल संस्कृत पाठ

महालक्ष्मी बीज मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥ श्री सूक्तम प्रथम ऋचा (ऋग्वेद): ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥ कुबेर मंत्र: ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये। धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं व्याख्या

कमल पुष्प पर आसीन हे परमेश्वरी महालक्ष्मी! आप मुझ पर प्रसन्न हों और अपनी दिव्य कृपा दृष्टि प्रदान करें। हे अग्निदेव! सुवर्णमयी कांति वाली, चंद्रमा के समान शीतलता प्रदायिनी और समस्त ऐश्वर्य की स्वामिनी महालक्ष्मी का हमारे गृह में आवाहन करें।

आध्यात्मिक फल एवं लाभ (फलश्रुति)

दारिद्र्य योग का शमन, व्यापार में निरंतर उन्नति, अकस्मात धनलाभ, कर्ज से मुक्ति एवं स्थिर ऐश्वर्य की प्राप्ति।

जाप एवं पाठ की शास्त्रोक्त विधि

दीपावली, धनतेरस अथवा शुक्रवार को कमल गट्टे या स्फटिक की माला से पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके १०८ बार जप करें।