दिवाली 2026 कब है? (Diwali 2026 Exact Date & Tithi)
वर्ष 2026 में रोशनी का महापर्व दीपावली (दिवाली) रविवार, 8 नवंबर 2026 को पूरे देश व विश्वभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
वैदिक पंचांग के अनुसार दीपावली प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को प्रदोष काल में मनाई जाती है।
अमावस्या तिथि का प्रारंभ व समाप्ति समय:
- कार्तिक अमावस्या तिथि प्रारंभ: 8 नवंबर 2026 को दोपहर 12:45 बजे
- कार्तिक अमावस्या तिथि समाप्त: 9 नवंबर 2026 को दोपहर 02:18 बजे
चूंकि 8 नवंबर को प्रदोष काल, स्थिर लग्न तथा महानिशीथ काल तीनों काल में अमावस्या तिथि विद्यमान है, इसलिए मुख्य लक्ष्मी-गणेश पूजन 8 नवंबर 2026 (रविवार) को ही शास्त्रसम्मत है।
दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजन के सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त (Lakshmi Puja Muhurat 2026)
शास्त्रों (धर्मसिंधु एवं निर्णयसिंधु) के अनुसार महालक्ष्मी पूजन सदैव प्रदोष काल में और विशेषकर स्थिर लग्न (वृषभ लग्न) में करना सर्वोत्तम माना गया है। स्थिर लग्न में पूजन करने से मां लक्ष्मी घर-परिवार एवं व्यापार में स्थिर रूप से वास करती हैं।
1. प्रदोष काल एवं वृषभ लग्न (गृहस्थों के लिए सर्वोत्तम मुहूर्त)
- प्रदोष काल: सायं 05:32 बजे से रात्रि 08:09 बजे तक
- वृषभ स्थिर लग्न (सर्वश्रेष्ठ): सायं 05:40 बजे से रात्रि 07:38 बजे तक
- मुहूर्त अवधि: 1 घंटा 58 मिनट
विशेष परामर्श: गृहस्थों, नौकरीपेशा परिवारों एवं व्यापारियों के लिए सायं 05:40 से रात्रि 07:38 के मध्य लक्ष्मी-गणेश व कुबेर देव का पूजन करना सबसे कल्याणकारी और ऐश्वर्य प्रदाता है।
2. महानिशीथ काल एवं सिंह लग्न (व्यापारियों, तांत्रिक व निशीथ साधकों के लिए)
- महानिशीथ काल: रात्रि 11:39 बजे से मध्यरात्रि 12:31 बजे तक
- सिंह लग्न (स्थिर लग्न): मध्यरात्रि 12:08 बजे से 02:24 बजे (9 नवंबर तड़के)
- अवधि: 52 मिनट (महानिशीथ काल)
दिवाली 2026 दिन और रात का चौघड़िया (Diwali Choghadiya Timings)
यदि आप प्रदोष काल के अलावा दुकान, फैक्ट्री, शोरूम या नवीन प्रतिष्ठान में पूजन करना चाहते हैं, तो शुभ चौघड़िया मुहूर्त का उपयोग करें:
| चौघड़िया मुहूर्त | प्रकार | समय (8 नवंबर 2026) | फल एवं उपयुक्त कार्य |
|---|---|---|---|
| चर (सामान्य/गतिमान) | दिन | प्रातः 07:58 से 09:21 तक | यात्रा, वाहन पूजन, बही-खाता तैयारी |
| लाभ (उन्नतिकारक) | दिन | प्रातः 09:21 से 10:44 तक | व्यापारिक लेन-देन, गल्ला/तिजोरी पूजन |
| अमृत (सर्वोत्तम) | दिन | प्रातः 10:44 से दोपहर 12:07 तक | नवीन प्रतिष्ठान, बही-खाता पूजन |
| शुभ (कल्याणकारी) | दिन | दोपहर 01:30 से 02:53 तक | पूजा, धार्मिक अनुष्ठान, दान |
| शुभ (कल्याणकारी) | सायं/रात्रि | सायं 05:32 से 07:09 तक | सर्वश्रेष्ठ प्रदोष काल लक्ष्मी पूजन |
| अमृत (सर्वोत्तम) | रात्रि | सायं 07:09 से 08:46 तक | महालक्ष्मी दीपदान, श्री सूक्त पाठ |
| चर (गतिमान) | रात्रि | रात्रि 08:46 से 10:23 तक | बही-खाता लेखनी, प्रसाद वितरण |
| लाभ (उन्नतिकारक) | तड़के | मध्यरात्रि 01:38 से 03:15 (9 Nov) | तांत्रिक साधना, कुबेर मंत्र सिद्धि |
चोपड़ा पूजन एवं बही-खाता मुहूर्त (Chopda Pujan 2026)
गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान एवं उत्तर भारत के व्यापारिक व औद्योगिक क्षेत्रों में दिवाली के दिन नए वित्तीय वर्ष (विक्रम संवत 2083) के लिए बही-खातों, कलम, तराजू, लैपटॉप और तिजोरी का पूजन किया जाता है जिसे चोपड़ा पूजन (Chopda Pujan) कहते हैं:
- प्रातः कालीन चोपड़ा मुहूर्त (लाभ व अमृत): प्रातः 09:21 से दोपहर 12:07 तक
- अपराह्न चोपड़ा मुहूर्त (शुभ): दोपहर 01:30 से 02:53 तक
- सायंकालीन चोपड़ा मुहूर्त (प्रदोष काल): सायं 05:40 से रात्रि 07:38 तक
चोपड़ा पूजन विधि: नए बही-खाते अथवा कंप्यूटर/लैपटॉप पर रोली व चंदन से स्वस्तिक (卐) और ‘श्री’ लिखें। उस पर अक्षत, पुष्प, दूर्वा, धूप, दीप और मिठाई अर्पित करें।
5 दिवसीय दीपोत्सव 2026 तिथियां (5-Day Diwali Calendar 2026)
- धनतेरस (Dhanteras / धनत्रयोदशी): 6 नवंबर 2026 (शुक्रवार) — यम दीपदान व सोना/चांदी/बर्तन खरीदारी
- नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली (Roop Chaudas): 7 नवंबर 2026 (शनिवार) — अभ्यंग स्नान व 14 दीप प्रज्वलन
- दीपावली / महालक्ष्मी पूजन (Diwali): 8 नवंबर 2026 (रविवार) — मुख्य लक्ष्मी, गणेश, सरस्वती व कुबेर पूजन
- गोवर्धन पूजा / अन्नकूट (Govardhan Puja): 9 नवंबर 2026 (सोमवार) — गोवर्धन पर्वत व गौ माता पूजन, गुजराती नूतन वर्ष (बेस्तू वर्ष)
- भाई दूज (Bhai Dooj / यम द्वितीया): 10 नवंबर 2026 (मंगलवार) — यमराज व यमुना पूजन, बहन द्वारा भाई को तिलक
महालक्ष्मी पूजन की शास्त्रीय षोडशोपचार विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)
- पवित्रिकरण व संकल्प: हाथ में जल, अक्षत व पुष्प लेकर आचमन करें — ‘ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥’
- चौकी स्थापना: उत्तर या पूर्व दिशा में लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला रेशमी वस्त्र बिछाएं।
- अक्षत अष्टदल कमल: चौकी पर गेहूं या साबुत चावल से अष्टदल कमल बनाएं।
- कलश स्थापना: तांबे या चांदी के कलश में गंगाजल, सिक्का, सुपारी, दूर्वा, आम के 5 पत्ते और नारियल रखकर स्थापित करें।
- मूर्तियों की प्रतिष्ठा: माता लक्ष्मी के बाईं ओर भगवान गणेश और दाईं ओर मां सरस्वती व कुबेर देव की प्रतिमा रखें।
- दीप प्रज्वलन: शुद्ध गाय के घी का एक बड़ा चौमुखा दीपक जलाएं जो रातभर प्रज्वलित रहे।
- षोडशोपचार अर्पण: पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, जनेऊ, रोली, चंदन, अक्षत, इत्र, कमल पुष्प, कमल गट्टा, पीली कौड़ियां, धूप, दीप, नैवेद्य (खीर, बताशे, लड्डू), ऋतुफल व पान-सुपारी अर्पित करें।
- चोपड़ा व तिजोरी पूजन: व्यापारी अपने बही-खाते, कलम, रोकड़ बही और तिजोरी का पूजन करें।
- मंत्र जप: महालक्ष्मी बीज मंत्र एवं श्री सूक्त का 11 या 108 बार पाठ करें।
- आरती: सर्वप्रथम श्री गणेश जी की आरती (जय गणेश जय गणेश देवा) और तदुपरांत महालक्ष्मी की आरती (ॐ जय लक्ष्मी माता) गाएं।
- दीपदान व क्षमा प्रार्थना: पूरे घर, द्वार, तुलसी चौराहा, रसोई और बालकनी में 21 या 27 तिल के तेल या सरसों के तेल के दीपक लगाएं और भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें।
दिवाली के सिद्ध मंत्र (Powerful Diwali Mantras)
1. महालक्ष्मी बीज मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः॥
(धन, ऐश्वर्य, यश और कर्ज मुक्ति हेतु कमलगट्टे की माला से १०८ बार जपें)
2. कुबेर धन प्राप्ति मंत्र
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ - Diwali 2026)
प्रश्न 1: दिवाली 2026 में लक्ष्मी पूजन का सबसे शुभ समय कौन सा है?
उत्तर: 8 नवंबर 2026 को सायं 05:40 बजे से रात्रि 07:38 बजे तक का समय सर्वश्रेष्ठ है। इस दौरान प्रदोष काल और वृषभ स्थिर लग्न एक साथ मिल रहे हैं।
प्रश्न 2: दिवाली पर कितने दीपक जलाने चाहिए?
उत्तर: दिवाली पर न्यूनतम 13, 21 अथवा 27 दीपक जलाने का विधान है। मुख्य पूजा स्थान पर एक बड़ा अखंड चौमुखा दीपक शुद्ध देसी घी का जलाएं। घर की चौखट, छत, तुलसी, जल स्त्रोत और मुख्य द्वार पर तिल के तेल के दीपक जलाएं।
प्रश्न 3: क्या 2026 में दिवाली पर सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण का कोई साया है?
उत्तर: नहीं, वर्ष 2026 की दिवाली पर भारत में किसी भी प्रकार का सूर्य ग्रहण अथवा चंद्र ग्रहण नहीं है। सूतक काल का कोई प्रभाव नहीं रहेगा। समस्त पूजन निर्विघ्न संपन्न होगा।